कोविड-19 उपचाराधीनों की देखरेख का किया अभ्यासमाकड्रिल
- जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में कोविड प्रबंधन का किया निरीक्षण
- संयुक्त निदेशक, सीएमएस, डीएसओ सहित अन्य अधिकारी ने उपचार की व्यवस्था परखी
जौनपुर, 22 अगस्त 2022 - जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में रविवार को एक एम्बुलेंस के कर्मचारी ने फोन कर एक कोविड-19 मरीज लेकर आने के बारे में जानकारी दी। इसके चलते अस्पताल कर्मी स्ट्रेचर, आक्सीजन सिलेंडर के साथ अस्पताल गेट पर तैनात हो गए। मरीज के पहुंचते ही अस्पताल गेट पर उसे आक्सीजन लगा दिया और उसे लेकर एमसीएच विंग के दूसरे फ्लोर पर पहुंच गए। वहां ड्यूटी रूम से निकल कर डाक्टर ने मरीज के कोरोना की पाज़िटिव जांच रिपोर्ट और मरीज को देखा। मूलभूत जांचों के बाद स्टाफ नर्स एवं अस्पताल कर्मचारियों को उपचार व सलाह देते हुए मरीज को वार्ड के लिए भेज दिया गया।
शासन के निर्देशानुसार कोविड उपचाराधीनों के उपचार की माकड्रिल की गई। माकड्रिल में उपचाराधीनों की स्थिति की गंभीरता के अनुसार उन्हें हाई डेपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) या आइसोलेशन बेड पर भेजा जा रहा था। जिन मरीजों में कोविड के हल्के लक्षण थे, उन्हें आइसोलेशन वार्ड में रखकर लक्षण के आधार पर (सिम्टोमैटिक) इलाज, देखरेख तथा वाइटल मानीटरिंग की गई। वाइटल मानीटरिंग में रक्तचाप, नाड़ी, श्वसन, तापमान और एसपीओ-2 मेंटेन करने की कोशिश की गई। 95 से कम रहने पर उन्हें आक्सीजन दिया गया। उसके बाद भी आक्सीजन लेवल में सुधार न होने पर एचडीयू वार्ड में भेजा गया। वहां भी आक्सीजन लेवल सही न होने पर हाई फ्लो नेजल कैनुला (एचएफएनसी) का इस्तेमाल किया गया। इस पर भी आक्सीजन लेवल मेंटेन न होने पर मरीज को गंभीर (सीवियर) समझकर आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर के माध्यम से इलाज किया गया।
महामारी रोग विशेषज्ञ डा जियाउलहक ने बताया कि कोविड में मरीजों की स्थिति के अनुसार उनकी तीन श्रेणी बनाई गई। पहली श्रेणी में हल्के कोविड लक्षण वाले मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखकर इलाज करते हैं। दूसरी श्रेणी को माडरेट या हल्का गंभीर मानते हैं। ऐसे मरीजों में देखते हैं कि उनमें पहले से कोई को-मॉर्बिडिटी तो नहीं है। को-मॉर्बिडिटी में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, टीबी, कैंसर, सीओपीडी, अस्थमा के मरीज आते हैं। उन्हें एचडीयू में रखकर बाईपेप मशीन तथा एचएफएनसी का उपयोग करते हैं। मरीज की गंभीरता की लगातार देखरेख करने के लिए मल्टी पैरा मानीटर की सुविधा रहती है जिसके माध्यम से उसकी वाइटल मानीटरिंग की जाती है। वाइटल मानीटरिंग में मरीज का रक्तचाप, श्वसन, नाड़ी, तापमान और एसपीओ-2 की निगरानी करते हैं। एसपीओ-2 में मरीज के हर सेकेण्ड की आक्सीजन की स्थिति को देखते हैं। मल्टी पैरा मानीटर मशीन से ही इको-कार्डियोग्राफी (ईसीजी) भी देखते रहते हैं।
इसके अलावा कोविड से ग्रसित बच्चों को इनफ्यूजन पम्प सिरिंज के जरिए उनकी उम्र और वजन के अनुसार दवा दी जाती है। इसमें सामान्यतया उन मरीजों को रखते हैं जिनका एसपीओ-2 लेवल 85 से 90 के बीच रहता है। ऐसी स्थिति में एचएफएनसी का इस्तेमाल करते हैं। एचडीयू और आईसीयू वार्ड में आक्सीजन अलार्मिंग की भी सुविधा रहती है जो आक्सीजन प्रेशर कम होने पर आवाज करने लगता है।
इस मौके पर संयुक्त निदेशक डा एमपी सिंह, जिला सर्विलांस अधिकारी (डीएसओ) डा संतोष जायसवाल, सीएमएस डा तबस्सुम बानो, एमसीएच विंग के नोडल डा संदीप सिंह, एसीएमओ डा एसपी मिश्रा, सर्विलांस मेडिकल आफिसर (एसएमओ) डा अभिजीत जोशे, रेडियोलॉजिस्ट डा एके पांडेय, पीडियाट्रिक्स डा दीपक जायसवाल, जिला महिला अस्पताल प्रबंधक डा आशीष यादव, नर्सिंग स्टाफ इंचार्ज प्रदीप गुप्ता एवं रुद्रेश, आपरेशन टेक्नीशियन (ओटी) बृजेश और निधी सिंह आदि मौजूद रहे।
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